रेनु शर्मा
मुज़फ्फरनगर*(हमारी चौपाल )
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा
के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारतीय किसानों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर गहरी चिंता जताई है। संगठन की ओर से इस संबंध में एक आधिकारिक ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति महोदया को जिलाधिकारी मुज़फ्फरनगर के माध्यम से प्रेषित किया गया।ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के अंतर्गत यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को शामिल किया गया, तो इससे देश के छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। अमेरिका जैसे देशों द्वारा कृषि एवं डेयरी उत्पादों पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी भारतीय किसानों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करेगी। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से पाँच प्रमुख माँगें रखी हैं, जिनमें बादाम, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को भविष्य के सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से बाहर रखने की संवैधानिक गारंटी, डेयरी क्षेत्र को पूर्ण सुरक्षा, किसी भी कृषि व्यापार समझौते से पहले किसान संगठनों की सहमति को अनिवार्य करना, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देना तथा वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से छोटे किसानों को बचाने के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान शामिल हैं। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ हैं। यदि कृषि व्यवस्था कमजोर होती है, तो देश की आत्मनिर्भरता और खाद्य सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संगठन ने राष्ट्रपति से संवैधानिक हस्तक्षेप कर किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। इस मौके पर
राष्ट्रीय संगठन मंत्री सालिम त्यागी
उत्तर प्रदेश सलाहकार ऐडवोकेट फेजयाब खान
महिला उत्तर प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सुदेश
उत्तर प्रदेश महासचिव महाराज जसवीर नाथ
उत्तर प्रदेश मंत्री चौधरी जुल्फिकार
एडवोकेट जिला सलाहकार फैसल सैफी
एडवोकेट नदीम चौधरी एडवोकेट नूरुलहक
भोपाल सिंह अनिल कुमार सैनी काजी मुस्तकीम शोएब राणा राशिद चौधरी शहजाद चौधरी सईद अहमद हसीब अंसारी संजो रानी मनोज आदि मौजूद रहे
