Hamarichoupal
विशेष संवाददाता
देहरादून, 24 जून:
उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा निदेशालयों में नए निदेशकों की नियुक्ति को लेकर विभागीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है। शीर्ष पद को हासिल करने के लिए विभाग के भीतर दावेदारों ने जोर-आजमाइश शुरू कर दी है।
वर्तमान में दोनों महत्वपूर्ण निदेशालयों का संचालन नियमित निदेशकों के बजाय ‘प्रभारी व्यवस्था’ के तहत किया जा रहा है। इन दोनों निदेशालयों का प्रभार अपर निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के पास है, जो आगामी 30 जून को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। डॉ. सती के सेवानिवृत्त होने की तिथि नजदीक आते ही विभाग के करीब आधा दर्जन अपर निदेशकों की नजरें निदेशक की कुर्सी पर टिक गई हैं।
वरिष्ठता सूची में ये अधिकारी हैं शामिल
विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में विभाग के पास वंदना गब्र्याल एकमात्र नियमित निदेशक हैं, जो इस समय एससीईआरटी (SCERT) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। गब्र्याल के बाद वरिष्ठता सूची में निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं:
विनोद प्रसाद सेमल्टी (सचिव, उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद)
गजेन्द्र सिंह सोन (अपर निदेशक)
कुंवर सिंह रावत (अपर निदेशक)
पदमेन्द्र सकलानी (अपर निदेशक)
परमेन्द्र कुमार (अपर निदेशक)
डीपीसी न होने से ‘प्रभारी व्यवस्था’ की ही संभावना
सूत्रों का कहना है कि इन पांचों वरिष्ठ अधिकारियों की निदेशक पद के लिए अभी तक विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में अब सब कुछ सरकार और विभागीय मंत्री के निर्णय पर निर्भर करता है। शासन स्तर पर या तो वंदना गब्र्याल को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है, या फिर इन पांचों अपर निदेशकों में से किन्हीं दो को प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा का जिम्मा सौंपा जा सकता है। हालांकि, लंबे समय से दोनों निदेशालयों में नियमित नियुक्ति न होने के कारण इस बार भी दोनों निदेशालयों के प्रभारी व्यवस्था के तहत ही संचालित होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
विवादों के बीच सेवा विस्तार के लिए दौड़-धूप
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान प्रभारी निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती अपनी सेवानिवृत्ति को टालने और सेवा विस्तार (एक्शटेंशन) पाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, शासन के उच्च अधिकारियों से लेकर सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि, शिक्षा विभाग में सेवा विस्तार को लेकर कोई स्पष्ट या नियमित व्यवस्था नहीं है।
जांच के घेरे में बीएड की डिग्री
डॉ. सती का विवादों से भी नाता रहा है। उन पर आरोप है कि पूर्व में हल्द्वानी के एक अशासकीय विद्यालय में सेवा के दौरान, उन्होंने संस्थागत छात्र (Regular Student) के रूप में अल्मोड़ा कैंपस से बीएड की डिग्री हासिल की थी। इस मामले की शासन स्तर पर जांच गतिमान है, जिस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। हाल ही में इस विवाद से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
अधीनस्थों में नाराजगी?
एक तरफ जहां डॉ. सती अपने अधीनस्थों के बीच पूरे आत्मविश्वास के साथ सेवा विस्तार मिलने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभागीय चर्चाओं के अनुसार, उनके कई अधीनस्थ कर्मचारी उनकी ‘एकला चलो’ की कार्यप्रणाली से नाराज हैं और विभाग में नए नेतृत्व की उम्मीद कर रहे हैं। अब देखना होगा कि 30 जून को शासन इस महत्वपूर्ण पद को लेकर क्या रुख अपनाता है।
