देहरादून, 2 नवंबर। विरासत महोत्सव-2026 में सोमवार को भारतीय कला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं का शानदार संगम देखने को मिला। महोत्सव के मंच पर जहां मास्टर शिल्पकारों के मार्गदर्शन में स्कूली बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं सूफियाना संगीत, भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शाम की सांस्कृतिक महफिल में सुप्रसिद्ध गायक ओसमान मीर के मधुर और प्रभावशाली गायन ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया।
महोत्सव के प्रथम सत्र में आयोजित हस्तशिल्प कार्यशाला में पांच अलग-अलग विद्यालयों के 80 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। मास्टर शिल्पकारों के मार्गदर्शन में बच्चों ने ऐपन कला, सांझी कला, टेराकोटा, फूल बनाने और टाई-एंड-डाई जैसी पारंपरिक हस्तशिल्प विधाओं को सीखा और अपनी कलाकृतियां तैयार कीं। मिट्टी पर उकेरी गई आकर्षक कलाकृतियों सहित बच्चों की रचनात्मकता ने अतिथियों को खासा प्रभावित किया। कार्यशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय पारंपरिक कला एवं शिल्प से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करना रहा।
कैम्ब्रियन हॉल के विद्यार्थियों की सूफियाना प्रस्तुति ने बांधा समां
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत कैम्ब्रियन हॉल के छात्र-छात्राओं की शानदार सूफियाना प्रस्तुति से हुई। विद्यालय के 54 विद्यार्थियों ने महान सूफी गायक नुसरत फतेह अली खान के लोकप्रिय गीत ‘सांसों की माला’ को सामूहिक रूप से प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। विद्यार्थियों की सुरीली आवाज, शानदार तालमेल और भावपूर्ण प्रस्तुति ने महफिल को सूफियाना रंग में रंग दिया।
भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक की त्रिवेणी ने मोहा मन
विरासत के मंच पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की तीन प्रमुख विधाओं भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक की संयुक्त प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। भरतनाट्यम में आरोही मुंशी, ओडिसी में वाणी माधव और कथक में मौमाला नायक ने अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संगीत निर्देशन एवं गायन की जिम्मेदारी सुधा रघुरामन ने संभाली।
प्रस्तुति की शुरुआत नागेंद्र राग से हुई। इसके बाद यमन और शिवरंजनी रागों में झपताल पर आधारित रचनाओं ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया। वाद्य संगत में प्रफुल्ल कुमार मंगराज ने पखावज, एम.वी. चंद्रशेखर ने मृदंगम, अब्दुल रहमान ने तबला और जय रघुरामन ने बांसुरी पर संगत दी। तीनों नृत्य शैलियों के भाव, मुद्राओं और लयबद्ध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
ओसमान मीर के गायन ने महफिल में भरा संगीत का जादू
महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या का एक प्रमुख आकर्षण सुप्रसिद्ध गायक ओसमान मीर और आमिर मीर की गायकी रही। अपनी बुलंद आवाज और विशिष्ट गायन शैली के लिए पहचान रखने वाले ओसमान मीर ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को संगीत की अलग ही दुनिया में पहुंचा दिया। उनके साथ तबले पर अब्दुल मीर और अय्यूब मीर, ढोलक पर हारून, ऑक्टोपैड पर इरशाद, कीबोर्ड पर चंदन और परशन पर युसुफ ने संगत की।
गुजरात के कच्छ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले ओसमान मीर ने भजन, गजल, अर्धशास्त्रीय, सुगम और गुजराती लोक संगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वह करीब 58 गुजराती फिल्मों में पार्श्व गायन कर चुके हैं और दुनिया के 25 देशों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उनकी गायकी पर नुसरत फतेह अली खान, मेहदी हसन, जगजीत सिंह और गुलाम अली जैसे दिग्गज कलाकारों का प्रभाव रहा है।
फिल्मकार संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ के लिए गाए गए लोकगीत ने भी उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। विरासत के मंच पर उनकी प्रस्तुति ने एक बार फिर साबित किया कि संगीत भाषा और सीमाओं से परे लोगों को जोड़ने की ताकत रखता है।
कुल मिलाकर विरासत महोत्सव का सोमवार भारतीय कला, शिल्प, शास्त्रीय नृत्य और संगीत की विविधता के नाम रहा। बच्चों की प्रतिभा से लेकर देश के प्रतिष्ठित कलाकारों की प्रस्तुतियों तक, हर कार्यक्रम ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि और निरंतरता को जीवंत कर दिया।
विरासत महोत्सव में भारतीय कला, संगीत और संस्कृति का दिखा अनूठा संगम
स्कूली बच्चों ने हस्तशिल्प कार्यशाला में दिखाई प्रतिभा, कैम्ब्रियन हॉल के विद्यार्थियों की सूफियाना प्रस्तुति ने बांधा समां; ओसमान मीर के गायन और शास्त्रीय नृत्यों ने मोहा मन
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