मिताली जोशी
देहरादून। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठन और सरकार को सक्रिय करने के लिए अगले दो माह का एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। दिल्ली में हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक में तय रणनीति के तहत विधायक अब अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक सक्रिय रहेंगे। मानसून के दौरान सामने आ रही जनसमस्याओं के समाधान के लिए विधायक सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क करेंगे और क्षेत्र की जरूरतों को सरकार तक पहुंचाएंगे।
पार्टी की रणनीति के केंद्र में जनता के बीच सक्रियता बढ़ाने के साथ ही विधायकों के स्थानीय चुनावी वादों को धरातल पर उतारना भी है। विधायकों को अपने क्षेत्रों में लोगों के बीच रहने, उनकी समस्याएं सुनने और जरूरत के मुताबिक सरकार से तत्काल समाधान कराने के लिए समन्वय स्थापित करने को कहा गया है। कोर कमेटी की बैठक में संगठन के स्तर पर पुराने और नाराज कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने पर भी जोर दिया गया। पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाएगी, जो किसी कारण से खुद को संगठन में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। अगले दो माह में होने वाले संगठनात्मक कार्यक्रमों में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई है।
इस दौरान विधायकों, संगठन पदाधिकारियों और विभिन्न दायित्वों पर मौजूद नेताओं की सक्रियता पर भी नजर रहेगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक सक्रिय रहने और जनसहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा की रणनीति जातीय समीकरणों के बजाय विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने की है। महिलाओं, युवाओं, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों समेत अलग-अलग वर्गों के लिए संगठनात्मक कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। सितंबर से अग्निवीरों का पहला बैच सेवा पूरी कर वापस लौटना शुरू करेगा। ऐसे में सरकार अग्निवीर सेल के माध्यम से उन्हें रोजगार और अन्य अवसरों से जोड़ने की दिशा में काम करेगी। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों को देखते हुए भाजपा उनके बीच भी अपनी पहुंच मजबूत करने की तैयारी में है। पार्टी इसके लिए नए सिरे से रणनीति तैयार कर रही है।
भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में हारी 23 सीटों को भी अपनी रणनीति के केंद्र में रखा है। इन सीटों पर अगले छह माह तक संगठन को विशेष रूप से सक्रिय रखने की योजना है। सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के साथ वरिष्ठ नेताओं के प्रवास भी इन क्षेत्रों में बढ़ाए जाएंगे। पार्टी इन सीटों पर संगठन की जमीनी सक्रियता और स्थानीय स्तर पर पकड़ के आधार पर मजबूत चेहरों की तलाश भी करेगी। इस तरह अगले कुछ महीनों में भाजपा का फोकस एक तरफ सरकार के कामकाज और विधायकों की सक्रियता पर रहेगा तो दूसरी ओर संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं को जोड़ने और कमजोर विधानसभा क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने पर होगा।
उत्तराखंड : चुनावी मोड में सरकार, पूरा एक्शन प्लान तैयार
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