Hamarichoupal,23,06,2026
देहरादून, 23 जून। भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर प्रसिद्ध शिक्षाविद्, ब्रह्मकमल फाउंडेशन की संस्थापक तथा पूर्व प्रदेश प्रवक्ता डॉ. सुनीता बौड़ाई विद्यार्थी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने अपने परिवार के पुरोधा, स्वतंत्रता सेनानी एवं पर्वतीय उत्तर प्रदेश में वर्ष 1952 से जनसंघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहे स्वर्गीय भुवनेश बौड़ाई विद्यार्थी के राष्ट्रहित में किए गए योगदान को भी स्मरण किया।
डॉ. सुनीता बौड़ाई विद्यार्थी ने कहा कि वह जनसंघ से भाजपा तक की तीसरी पीढ़ी की सक्रिय कार्यकर्ता हैं और ऐसे सभी जनसंघ परिवारों का सम्मान होना चाहिए, जिन्होंने संगठन को खड़ा करने में अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि आज उन परिवारों की सुध लेने की आवश्यकता है, जिन्होंने अपने खून-पसीने से संगठन को सींचा और राष्ट्रवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने उस कठिन दौर में मिट्टी के दीये की लौ को जलाकर रखा था, आज उसी की बदौलत यह कमल खिल रहा है। यदि वे राष्ट्र के प्रति समर्पित कार्यकर्ता अपना सब कुछ न्योछावर न करते, तो आज देश की तस्वीर कुछ और होती।”
डॉ. सुनीता ने बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में देशभर के पुराने जनसंघ परिवारों को स्मरण किया जाना उनके परिवार के लिए गर्व का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के अनेक जनसंघ परिवार आज भी अपनी नई पीढ़ियों के माध्यम से पार्टी और राष्ट्र सेवा में निरंतर सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि संगठन के शुरुआती दौर में संसाधनों का अभाव था, फिर भी कार्यकर्ता पहाड़ों के दुर्गम क्षेत्रों और बीहड़ जंगलों में मीलों पैदल चलकर गांव-गांव पहुंचे तथा राष्ट्रवाद की अलख जगाई। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुनीता बौड़ाई विद्यार्थी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित जनसंघ से जुड़े सभी दिवंगत कार्यकर्ताओं और परिवारों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण की अमूल्य धरोहर बताया।
