द टॉसब्रिज स्कूल के संस्कार दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह में विद्यार्थियों को दिया सफलता का मंत्र, पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिलने की कही बात
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को देहरादून स्थित द टॉसब्रिज स्कूल में आयोजित संस्कार दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कार, अनुशासन, ईमानदारी और जीवन मूल्यों का महत्व समझाते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक और व्यावसायिक सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक अच्छा इंसान बनाना भी है। आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान भी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कार दिवस भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है। ज्ञान व्यक्ति को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है, जबकि संस्कार उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। चरित्र, अनुशासन, ईमानदारी और नैतिक मूल्य जीवन में सफलता की मजबूत नींव हैं। उन्होंने विद्यालय द्वारा आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को महत्व देने की सराहना की।
डॉ. कलाम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि द टॉसब्रिज स्कूल का उद्घाटन वर्ष 2015 में पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। डॉ. कलाम का जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विद्यार्थियों को उनकी आत्मकथा ‘विंग्स ऑफ फायर’ (अग्नि की उड़ान) पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बड़े सपने देखने के साथ उन्हें साकार करने के लिए निरंतर मेहनत, दृढ़ संकल्प और अनुशासन भी जरूरी है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना भारत की पहचान है। सभी के प्रति सम्मान, बड़ों का आदर, विविधताओं को स्वीकार करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भारतीय संस्कारों के अभिन्न अंग हैं। विद्यालय के ध्येय वाक्य ‘ज्ञानं भारः क्रियां बिना’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कर्म के बिना ज्ञान अधूरा है। ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसका उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में किया जाए।
तकनीक और नवाचार के दौर में कौशल जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रौद्योगिकी, नवाचार और आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाला समय नई तकनीकों, कौशल और रचनात्मकता का है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों में दक्षता हासिल करने के साथ योग, ध्यान, अनुशासन और संस्कारों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल विकास और रचनात्मकता पर विशेष ध्यान दिया गया है। राज्य सरकार भी उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रयासरत है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार सृजन के लिए भी प्रोत्साहित करना है।
पारदर्शी भर्ती व्यवस्था से 35 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी
मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उनके अनुसार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और निरंतर सीखने की इच्छा ही सफलता का वास्तविक आधार हैं। असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षित, संस्कारित, कुशल और आत्मनिर्भर युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि द टॉसब्रिज स्कूल के विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा और अच्छे संस्कारों के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।
समारोह में विद्यालय प्रबंधन एवं प्रशासन से जुड़े पदाधिकारी, शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
संस्कारों और अनुशासन से ही मिलेगी सफलता, आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति का ज्ञान भी जरूरी: सीएम धामी
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