अनुराग गुप्ता
देहरादून। मियांवाला में लंबे समय से उपेक्षित पड़े पुराने जौहड़ की तस्वीर अब पूरी तरह बदल गई है। जहां कभी कूड़े के ढेर, गंदगी और जंगली झाड़ियां दिखाई देती थीं, वहीं अब करीब 8.64 करोड़ रुपये की लागत से विकसित ‘जल सृष्टि पार्क’ लोगों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन गया है। खास बात यह है कि पार्क विकसित करते समय पुराने जलस्रोत के मूल स्वरूप को संरक्षित रखा गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मियांवाला में जल सृष्टि पार्क का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि जलस्रोतों का संरक्षण केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने पार्क को स्वच्छ, स्वस्थ और हरित देहरादून की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
एमडीडीए ने बदली जौहड़ की तस्वीर
राजकीय इंटर कॉलेज मियांवाला के समीप स्थित जौहड़ की भूमि लंबे समय से अव्यवस्था का शिकार थी। यहां कूड़ा डाले जाने के साथ जंगली झाड़ियों और जलभराव की समस्या बनी रहती थी। ऐसे में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने करीब 8 करोड़ 63 लाख 83 हजार 518 रुपये की लागत से इस क्षेत्र के कायाकल्प की योजना तैयार की। परियोजना का निर्माण मार्च 2024 में शुरू हुआ और मार्च 2026 में पार्क तैयार हो गया।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की निगरानी में विकसित इस परियोजना की खासियत यह है कि पुराने जौहड़ को खत्म करने के बजाय उसे पार्क की पहचान का केंद्र बनाया गया है।
तालाब के बीच आइलैंड और पेडल बोटिंग बना आकर्षण
जल सृष्टि पार्क में तालाब और उसके बीच विकसित आइलैंड लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां पेडल बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री धामी ने इसे देहरादून में ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ देने वाला स्थल बताया।
पार्क में सुबह-शाम टहलने और दौड़ने के लिए जॉगिंग ट्रैक, योग के लिए योगा डेक, बैठने के लिए बेंच व गजीबो, महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय और जलपान गृह जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क तथा फूलों और वनस्पतियों की जानकारी देने के लिए एजुकेशनल फ्लावर गार्डन भी बनाया गया है।
इसके अलावा पार्क में पक्षी एवं जैव विविधता उद्यान विकसित किया गया है। स्थानीय प्रजातियों के पौधों और छायादार वृक्षों को भी स्थान दिया गया है, जिससे पार्क पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिहाज से उपयोगी बन सके।
पुराने जलस्रोत को बचाकर आधुनिक सुविधाओं का संगम
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास का अर्थ केवल कंक्रीट के ढांचे तैयार करना नहीं है। विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें हरियाली, जल संरक्षण, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं का संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल और जंगल को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है, इसलिए पुराने तालाबों और जलस्रोतों का पुनर्जीवन जरूरी है।
मियांवाला का जल सृष्टि पार्क इसी सोच का उदाहरण बनकर सामने आया है। एक उपेक्षित जलस्रोत को संरक्षित करते हुए यहां हरित क्षेत्र, जैव विविधता, मनोरंजन और स्वास्थ्य सुविधाओं को एक साथ विकसित किया गया है।
पार्क को स्वच्छ रखना समाज की भी जिम्मेदारी
लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से पार्क की स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार पार्क का निर्माण कर सकती है और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसकी देखभाल करना समाज की साझा जिम्मेदारी है।
मियांवाला का जल सृष्टि पार्क अब केवल एक नया सार्वजनिक स्थल नहीं, बल्कि पुराने जलस्रोत के संरक्षण के साथ आधुनिक शहरी सुविधाओं को विकसित करने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। आगामी समय में यह देहरादून के प्रमुख जनसरोकार वाले सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो सकता है।
