अनुराग गुप्ता
देहरादून। नए बाईपास से प्रेमनगर को जोड़ने वाले पुल पर बारिश के बाद बने जलभराव ने निर्माण और जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुल पर इतना पानी जमा हो गया कि वाहन चालकों को सड़क और पानी के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया। हालात ऐसे नजर आए कि गाड़ियां सड़क पर चलने के बजाय पानी में तैरती हुई दिखाई दीं।
मौके की तस्वीरें और वीडियो सिस्टम की उस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं, जिसके दम पर इस मार्ग को लोगों के आवागमन के लिए तैयार किया गया है
अब सवाल सीधे जिम्मेदार विभागों से—
बारिश के पानी की निकासी के लिए पुल पर क्या इंतजाम किए गए थे?
क्या निर्माण के दौरान जल निकासी व्यवस्था का पर्याप्त प्रावधान किया गया था?
अगर व्यवस्था सही थी तो कुछ ही बारिश में पुल पर इतना पानी क्यों भर गया?
क्या सड़क और पुल के निर्माण में ढलान और ड्रेनेज की तकनीकी जांच हुई थी?
क्या संबंधित विभाग ने मानसून से पहले इस पुल का निरीक्षण किया था?
अगर किया था तो जलभराव की समस्या पहले क्यों नहीं पकड़ी गई?
क्या निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय होगी या हर बार बारिश को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा?
पुल पर फंसे वाहन चालकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
क्या जलभराव से सड़क और पुल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है?
जनता के पैसे से बने इस बाईपास की ऐसी स्थिति के लिए कौन जवाब देगा?
