देहरादून। आगामी 24 से 27 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ठावड़ा मेल की तैयारियों को लेकर द्वितीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ कुंदन सिंह चौहान ने किया, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार बलदेव चंद्र भट्ट ने की। बैठक में मेले को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के साथ ही विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने पर विशेष मंथन हुआ।
बैठक में श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने आयोजन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेष रूप से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं, आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं, यातायात एवं अन्य आवश्यक इंतजामों के साथ कार्यकर्ताओं के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई।
बैठक में यह निर्णय भी प्रमुखता से सामने आया कि ठावड़ा मेल को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे उत्तराखंड और तराई-भाबर की साझा सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बनाया जाएगा। मेले में कुमाऊंनी, जौनसारी, गढ़वाली, गोरखाली, पंजाबी सहित तराई-भाबर क्षेत्र में निवास करने वाले विभिन्न समुदायों की संस्कृति, लोक परंपराओं, वेशभूषा, लोकगीत और लोकनृत्यों को प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। इससे मेले में उत्तराखंड की विविध संस्कृति के साथ सामाजिक समरसता की भी झलक देखने को मिलेगी।
वक्ताओं ने कहा कि ठावड़ा मेल क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इसकी सफलता के लिए सभी को दलगत एवं व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर आपसी समन्वय और सहयोग के साथ कार्य करना होगा। आयोजन को व्यवस्थित एवं यादगार बनाने के लिए समितियों और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने तथा व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में राज्य मंत्री जोत सिंह बेस्ट, ज्योति राजवार, ममता पागती, संजना कुनियाल, कल्पना राठौर, पूनम सती, अभय कुमार, नरेश शाह, अनिल बिष्ट, हरीश सामंत, डॉ. अभिनव कुमार, आचार्य विमल पांडे, बसंत शर्मा, अंजना, हेमंत, नरेश, राम गोयल, राजेंद्र सिंह बिष्ट, विपिन, नरेश सिंह, उर्मिला चौहान, निकेश वर्मा, हरीश धामी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
बैठक के अंत में उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि आपसी सहयोग और सहभागिता के माध्यम से इस वर्ष के ठावड़ा मेल को भव्य, दिव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाया जाएगा। सभी ने आयोजन की तैयारियों में पूर्ण सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
ठावड़ा मेल को भव्य और ऐतिहासिक बनाने पर मंथन, सभी समुदायों की संस्कृति को मिलेगा मंच
श्रद्धालुओं की सुविधाओं से लेकर आयोजन व्यवस्था तक पर हुई चर्चा, कुमाऊंनी-जौनसारी, गढ़वाली, गोरखाली और पंजाबी संस्कृति की दिखेगी झलक
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