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देहरादून। गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल, झाझरा में नेत्र रोग विभाग एवं मेडिकल एजुकेशन यूनिट की ओर से द्वितीय डॉ. के.के. भटनागर मेमोरियल वार्षिक सीएमई ‘सुभारती ऑप्थाकॉन-2026’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर से आए प्रतिष्ठित नेत्र रोग विशेषज्ञों, चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट्स ने आधुनिक नेत्र चिकित्सा, नवीन उपचार पद्धतियों और विशेष रूप से ऑक्यूलर ट्रॉमा के उपचार एवं प्रबंधन पर गहन मंथन किया।
कार्यक्रम स्वर्गीय डॉ. के.के. भटनागर की स्मृति को समर्पित रहा। सुभारती ग्रुप के संस्थापक प्रो. डॉ. अतुल कृष्ण एवं चांसलर डॉ. यशवर्धन का मार्गदर्शन आयोजन का प्रमुख आधार रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सीएमई को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक और उपचार पद्धतियां लगातार बदल रही हैं, ऐसे में चिकित्सकों का नवीनतम शोध और तकनीकों से अपडेट रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से वरिष्ठ विशेषज्ञों के अनुभव युवा चिकित्सकों और रेजिडेंट्स तक पहुंचते हैं, जिसका सीधा लाभ मरीजों को बेहतर उपचार के रूप में मिलता है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. आर.सी. गुप्ता, प्राचार्य एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ ने सीएमई के वैज्ञानिक स्वरूप की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सम्मेलन चिकित्सकों को अपने क्लीनिकल अनुभव, शोध और नवीनतम चिकित्सा ज्ञान को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने युवा चिकित्सकों और पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट्स की सक्रिय भागीदारी को चिकित्सा शिक्षा के भविष्य के लिए सकारात्मक बताया।
65 हजार सर्जरी का अनुभव किया साझा
सीएमई का प्रमुख आकर्षण देश के विख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं पद्मश्री प्रो. डॉ. एस. नटराजन का डॉ. के.के. भटनागर ऑरेशन रहा। उन्होंने ‘द फाइन आर्ट एंड साइंस ऑफ मैनेजिंग ऑप्थैल्मिक ट्रॉमा—लेसन्स फ्रॉम 65,000 सर्जरीज’ विषय पर अपने छह दशकों से अधिक के व्यापक सर्जिकल अनुभव साझा किए। ऑक्यूलर ट्रॉमा के जटिल मामलों के प्रबंधन और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों पर उनकी प्रस्तुति ने चिकित्सकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
सीएमई के प्रथम वैज्ञानिक सत्र में रेजिडेंट्स के लिए कम्पेटिटिव पीजी फ्री पेपर सेशन आयोजित किया गया। इसमें युवा चिकित्सकों ने अपने शोध एवं मौलिक कार्य प्रस्तुत किए। इसके अलावा विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में नेत्र चिकित्सा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
ऑक्यूलर ट्रॉमा पर विशेष फोकस
आयोजन में ऑक्यूलर ट्रॉमा को फ्री पेपर और पोस्टर प्रतियोगिता का मुख्य विषय बनाया गया। विशेषज्ञों ने आंखों की चोट के मामलों में समय पर उपचार, सही क्लीनिकल निर्णय और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के महत्व पर चर्चा की। पोस्टर इवैल्यूएशन और स्किल लैब सेशन में युवा चिकित्सकों को अपने शोध और व्यावहारिक कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
द्वितीय वैज्ञानिक सत्र में भी देश-प्रदेश के कई वरिष्ठ विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक चर्चा, शोध प्रस्तुतियों और विशेषज्ञ व्याख्यानों के माध्यम से नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम बदलावों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम के चीफ एडवाइजर डॉ. राजेश तिवारी ने कहा कि आंख मानव शरीर के सबसे संवेदनशील अंगों में से एक है। आंखों की चोट के मामलों में समय पर सही निर्णय, विशेषज्ञ उपचार और आधुनिक सर्जिकल तकनीक मरीज की दृष्टि बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन प्रो. डॉ. यूसुफ रिजवी ने कहा कि ऐसे सीएमई चिकित्सकों को नवीनतम शोध, उपचार पद्धतियों और वास्तविक क्लीनिकल अनुभवों से जोड़ते हैं। साथ ही युवा चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखने और अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. डॉ. देश दीपक, प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. अनिल के. मेहता, उप प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. रूपा हंसपाल, एचएमसी डॉ. अनिल मोंगिया, डायरेक्टर बीहाइव अमित जोशी एवं अवनी कमल सहित अनेक चिकित्सक, विशेषज्ञ और चिकित्सा शिक्षाविद मौजूद रहे।
समापन अवसर पर वैलेडिक्टरी एवं अवार्ड सेशन आयोजित किया गया। वैज्ञानिक प्रस्तुतियों एवं प्रतियोगितात्मक सत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवा चिकित्सकों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. ज्योति शर्मा ने सभी विशेषज्ञ वक्ताओं, चिकित्सकों, रेजिडेंट्स, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़ी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय डॉ. के.के. भटनागर की स्मृति में आयोजित यह वार्षिक सीएमई आने वाले वर्षों में भी नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में ज्ञान-विनिमय, शोध और अकादमिक उत्कृष्टता का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
