हमारी चौपाल
नई दिल्ली/देहरादून, 10 जुलाई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में देश की पहली ‘Land Border District SPs Conference-2026’ आयोजित की गई। सम्मेलन में उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित राज्य के पांचों अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जनपदों—ऊधमसिंहनगर, पिथौरागढ़, चम्पावत, उत्तरकाशी और चमोली के पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया।
सम्मेलन में सीमा-पार आतंकवाद, संगठित अपराध, सीमा सुरक्षा, वित्तीय अपराध, अवैध धन प्रवाह, सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन तथा सीमा विकास में सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उत्तराखंड की ओर से आधुनिक तकनीक आधारित सीमा निगरानी, सीमा-पार अपराधों की रोकथाम, स्थानीय खुफिया तंत्र को मजबूत करने, सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए गए।
‘कम्युनिटी एंगेजमेंट फॉर बॉर्डर डेवलपमेंट’ विषयक सत्र में चम्पावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने उत्तराखंड पुलिस के जन-केंद्रित पुलिसिंग मॉडल का प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने ‘फाइव पिलर्स ऑफ कम्युनिटी फोर्स मल्टीप्लिकेशन’—विश्वास, सूचना, सहभागिता, क्षमता निर्माण तथा प्रोत्साहन एवं संरक्षण—की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए सीमांत क्षेत्रों में आयोजित ‘रात्रि चौपाल’ अभियान और पिथौरागढ़ के ‘गुंजी मॉडल’ को रिवर्स माइग्रेशन के सफल उदाहरण के रूप में साझा किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की अवधारणा के तहत सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण तथा देश को घुसपैठ से मुक्त बनाने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित की जाएगी। साथ ही ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के माध्यम से सीमांत गांवों में पलायन रोकने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव की सूचनाओं को समय पर साझा करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रॉक्सी वार, कट्टरपंथ, ड्रोन, साइबर अपराध और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना देश की प्राथमिकता है।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि यह सम्मेलन सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, समन्वित और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में साझा किए गए अनुभव और नवाचार सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा, विकास और नागरिक सहभागिता को और अधिक सशक्त बनाएंगे।
