नई टिहरी(आरएनएस)। टिहरी बांध परियोजना बनने के बाद भागीरथी नदी पर स्थित ऐतिहासिक छाम पुल वर्ष 2005 में झील में समा गया था। पुल डूबने के साथ ही टिहरी और उत्तरकाशी जिलों के करीब 40 गांवों के बीच संपर्क टूट गया था लेकिन दो दशक बाद भी कंडीसौड़ छाम-बल्डोगी पुल निर्माण की मांग अधूरी है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टिहरी प्रस्तावित दौरे से क्षेत्रवासियों में पुल निर्माण की उम्मीद फिर से जगी है।स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान लंबे समय से लंबित कंडीसौड़ छाम-बल्डोगी पुल निर्माण करने की घोषणा कर सकते हैं। टिहरी झील बनने से पहले छाम पुल टिहरी और उत्तरकाशी जिलों के गांवों के बीच आवागमन की मुख्य साधन था। वर्ष 1960 में बने इस झूला पुल से लोग कुछ ही मिनटों में नदी पार कर लेते थे लेकिन झील बनने के बाद लोगों को अब चिन्यालीसौड़ होकर करीब 40 किलोमीटर लंबा सफर तय करना पड़ता है।
झील के आरपास बसे गांव के लोगों को अपने नाते रिश्तेदारी में जाने के लिए नाॅव से आवागमन करना पड़ता है। ब्लॉक प्रमुख सुरेंद्र सिंह भंडारी, गंगा प्रसाद खंडूड़ी का कहना है कि प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौर से कंडीसौड़ छाम-बल्डोगी पुल निर्माण की फिर से उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों की जन भावनाओं और समस्या को देखते हुए उन्होंने पुल निर्माण करने की मांग की है।
प्रधानमंत्री के दौरे से जगी छाम-बल्डोगी पुल निर्माण की उम्मीद
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