HamariChoupal,29,03,2026
देहरादून। पटेल नगर थाना क्षेत्र में दो नाबालिग बालिकाओं के लापता होने की गंभीर घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इन्हें किसी भी हालत में सामान्य नहीं माना जा सकता। आयोग ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से त्वरित और निष्पक्ष जांच कर शीघ्र आख्या प्रस्तुत करने को कहा है।
जानकारी के अनुसार, थाना पटेल नगर में इस संबंध में विधिवत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस की तत्परता से 16 वर्षीय एक बालिका को बरामद कर लिया गया है, जबकि 14 वर्षीय दूसरी बालिका अभी भी लापता है। प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर उसके बिहार में होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही यह भी संज्ञान में आया है कि दोनों बालिकाओं के अपहरण में बिहार के कुछ युवकों की भूमिका होने की आशंका है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।
डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर संवेदनशील बस्तियों में विशेष सतर्कता और सत्यापन व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि बाहरी क्षेत्रों से आए कई परिवारों की महिलाएं और बच्चे असुरक्षा, हिंसा और शोषण जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर पुलिस सत्यापन, सामुदायिक निगरानी और जागरूकता बेहद आवश्यक है।
आयोग ने यह भी गंभीरता से लिया है कि संबंधित बालिकाएं विद्यालय नहीं जा रही थीं। डॉ. खन्ना ने कहा कि स्कूल छोड़ चुके बच्चों की समय पर पहचान न होना एक बड़ी चिंता का विषय है। अब आयोग इस पहलू की भी समीक्षा करेगा कि ड्रॉप-आउट बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए तंत्र कितना सक्रिय है और स्कूलों, अभिभावकों तथा स्थानीय निकायों की क्या भूमिका है।
हाल ही में रिस्पना पुल क्षेत्र में तीन बहनों के घर से नाराज होकर बाहर चले जाने की घटना का उल्लेख करते हुए आयोग ने कहा कि अब केवल लापता बच्चों की घटनाओं को अलग-अलग मामलों की तरह देखने के बजाय उनके सामाजिक कारणों को भी समझना होगा। बच्चों का घर से नाराज होकर निकल जाना, संवादहीनता, ट्रैफिकिंग का खतरा और अन्य बाल अपराध आपस में जुड़े मुद्दे हैं। आयोग का मानना है कि विद्यालयों को भी जागरूकता अभियान का सक्रिय हिस्सा बनना होगा।
डॉ. खन्ना ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के साथ स्वस्थ, खुला और भरोसेमंद संवाद बनाए रखें, ताकि बच्चों के मन की बात समय रहते समझी जा सके और उनकी समस्याओं का समाधान घर के भीतर ही निकल सके। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यवहार, दोस्ती, स्कूल से दूरी, मानसिक तनाव और अचानक बदले स्वभाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जल्द ही व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें ग्राउंड लेवल कार्यकर्ताओं, स्कूलों, बस्तियों, स्थानीय समुदायों और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज में सतर्कता बढ़ाई जा सके।
अंत में आयोग ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक, अपुष्ट या अफवाहनुमा जानकारी साझा न करें और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें।
