देहरादून, 2 जुलाई। मानसून के दौरान संभावित बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से गुरुवार को देहरादून जनपद के सात संवेदनशील स्थानों पर एक साथ व्यापक मॉकड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन, लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान का अभ्यास किया।
सुबह 9:30 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को काल्पनिक सूचना मिली कि भारी बारिश के कारण जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़, जलभराव और भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं तथा कई लोग फंस गए हैं। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) सक्रिय किया गया। सभी नोडल अधिकारियों, एसडीएम और इंसीडेंट कमांडरों को अलर्ट कर रेस्क्यू टीमें तत्काल घटनास्थलों के लिए रवाना की गईं। सुबह 10:10 बजे तक सभी टीमें अपने-अपने निर्धारित स्थलों पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं। पूरे अभियान की निगरानी कंट्रोल रूम से अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा द्वारा की गई।
मॉकड्रिल के तहत सहस्रधारा और कार्लीगाड़ क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंसे पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया गया। इस दौरान दो लोगों को मृत तथा सात गंभीर और तीन सामान्य घायलों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल भेजने की कार्रवाई की गई।
ऋषिकेश के गौहरीमाफी क्षेत्र में चंद्रभागा, सुसवा और सौंग नदियों में आई काल्पनिक बाढ़ के चलते 60 से 70 परिवारों के फंसने की स्थिति बनाई गई। रेस्क्यू टीमों ने नाव और राफ्ट की सहायता से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया तथा आठ घायलों को अस्पताल भेजा।
विकासनगर के जमनीपुर-सहसपुर क्षेत्र में आसन और स्वर्णा नदी के उफान से बस्तियों और कृषि भूमि में जलभराव की स्थिति दर्शाई गई। प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया, जबकि चार गंभीर घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहसपुर भेजा गया।
मसूरी के लंबीधार-किमाड़ी मार्ग पर भूस्खलन और बोल्डर गिरने से सड़क अवरुद्ध होने की स्थिति में जेसीबी मशीनों से मलबा हटाकर मार्ग को सुचारू किया गया तथा फंसे वाहनों को सुरक्षित निकाला गया।
डोईवाला के दूधली क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा के कारण जलभराव की स्थिति बनाकर सबसे पहले बिजली आपूर्ति बंद की गई। इसके बाद रेस्क्यू टीमों ने चार घायलों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया और चार परिवारों को राहत शिविर में शिफ्ट किया।
वहीं चकराता-त्यूनी मोटर मार्ग पर धारनधार के पास भूस्खलन की काल्पनिक घटना में फंसे यात्रियों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई तथा जेसीबी मशीनों की मदद से लगभग एक घंटे के भीतर मार्ग को दोबारा यातायात के लिए खोल दिया गया।
अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा ने कहा कि इस मॉक अभ्यास का उद्देश्य आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संसाधनों के उपयोग और राहत एवं बचाव कार्यों की दक्षता को परखना था। उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान सामने आई कमियों का परीक्षण कर आवश्यक संसाधनों और उपकरणों की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जाएगी, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी राहत कार्य किए जा सकें।
मॉकड्रिल के दौरान जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र में आईआरएस से जुड़े सभी विभागों के नोडल अधिकारी मौजूद रहे और पूरे अभियान की लगातार निगरानी की गई।
नदी में फंसे लोग, पहाड़ से गिरे बोल्डर… मॉकड्रिल में दिखा हाई अलर्ट का नजारा
देहरादून के सात संवेदनशील क्षेत्रों में एक साथ मॉकड्रिल, आपदा से निपटने की तैयारियां परखी गईं
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