Hamarichoupal,19,03,2026
उत्तराखंड की पहाड़ियों से निकलकर अपनी आवाज़ के दम पर वैश्विक मंच तक पहुँचने वाली गायिका Nupur Pant (नूपुर पंत) आज उस नई पीढ़ी की कलाकारों में शामिल हैं जो परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सुंदर सेतु बना रही हैं। हिमालय की वादियों में पली-बढ़ी नूपुर के संगीत में पहाड़ की शांति, प्रकृति की लय और लोकसंस्कृति की आत्मा स्पष्ट रूप से झलकती है। यही कारण है कि उनकी गायकी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव बन जाती है।
नूपुर पंत की संगीत यात्रा छोटे मंचों और इंटरनेट माध्यमों से शुरू हुई। उन्होंने यूट्यूब पर अपने मिश्रित गीतों और प्रस्तुतियों के माध्यम से तेजी से लोकप्रियता हासिल की। विभिन्न भाषाओं के गीतों और आधुनिक संगीत शैलियों को मिलाकर प्रस्तुत किए गए उनके गीतों ने लाखों-करोड़ों श्रोताओं तक पहुँच बनाई और उन्हें इंटरनेट की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई। इन माध्यमों के जरिए उन्होंने अपने श्रोताओं का एक मजबूत समूह तैयार किया, जहाँ वह केवल प्रस्तुतियाँ ही नहीं बल्कि अपने मौलिक गीतों और गीत-लेखन के माध्यम से भी सक्रिय रहीं। एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में उनका यह सफर आज अनेक युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
इंटरनेट पर मिली सफलता ने उनके लिए फ़िल्म और वेब श्रृंखलाओं की दुनिया के द्वार भी खोल दिए। हाल ही में उनकी आवाज़ Bada Naam Karenge (बड़ा नाम करेंगे) नामक वेब श्रृंखला में सुनाई दी, जिसका संगीत प्रसिद्ध संगीतकार Anurag Saikia (अनुराग सैकिया) ने तैयार किया है। इस परियोजना का चर्चित गीत “चीटर बलमा” नूपुर पंत और लोकप्रिय गायक Mohit Chauhan (मोहित चौहान) का युगल गीत है, जिसके बोल गीतकार Avinash Chouhan (अविनाश चौहान) ने लिखे हैं। यह गीत श्रोताओं के बीच काफी सराहा गया और इससे नूपुर की बहुमुखी गायकी की झलक भी देखने को मिली।
नूपुर पंत केवल ध्वनि-रिकॉर्डिंग तक सीमित कलाकार नहीं हैं, बल्कि एक प्रभावशाली मंचीय प्रस्तुतकर्ता भी हैं। अपने अब तक के सफर में वह दुनिया भर में 1500 से अधिक प्रत्यक्ष प्रस्तुतियाँ दे चुकी हैं। सरकारी, निजी और विभिन्न संस्थागत कार्यक्रमों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक उनकी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है। उनके कार्यक्रमों में आधुनिक संगीत, फ़िल्मी गीतों और पहाड़ी लोकधुनों का अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो उन्हें एक अलग पहचान देता है।
नूपुर के संगीत की सबसे विशेष बात यह है कि वह अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उत्तराखंड की लोकधुनों और परंपराओं को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर प्रस्तुत करना उनके कार्य की विशेषता है। देहरादून के प्रसिद्ध एनीमेशन कलाकार Ketan Pal (केतन पाल) द्वारा बनाई गई एक एनीमेशन फ़िल्म, जो मकर संक्रांति पर्व की सांस्कृतिक कथा को दर्शाती है, उसके लिए नूपुर पंत और Kedarnath (केदारनाथ) ने मिलकर एक शीर्षक गीत तैयार किया। यह परियोजना न केवल उत्तराखंड की लोक परंपराओं को दर्शाती है बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर भी सराहना मिली है। उनके संगीत को अक्सर “माउंटेन सोल” के रूप में पहचाना जाता है, जो हिमालय की शांति, प्रकृति और पहाड़ी जीवन की संवेदनाओं से प्रेरित है।
संगीत के साथ-साथ नूपुर पंत कला के लिए अवसर पैदा करने का काम भी कर रही हैं। मुंबई के अंधेरी पश्चिम क्षेत्र में उन्होंने “थर्ड बेल स्टूडियो” नाम से एक प्रस्तुति स्थल की स्थापना की है। इस स्थान का उद्घाटन प्रख्यात अभिनेता Naseeruddin Shah (नसीरुद्दीन शाह) और अभिनेत्री Ratna Pathak Shah (रत्ना पाठक शाह) की उपस्थिति में हुआ। यह स्थल संगीत, रंगमंच, हास्य प्रस्तुति और अन्य मंचीय कलाओं के लिए समर्पित है, जहाँ उभरते और युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। यह पहल नूपुर की उस सोच को दर्शाती है जिसमें वह कला और कलाकारों के लिए नए अवसर तैयार करना चाहती हैं।
नूपुर पंत की उपलब्धियों को देशभर में सराहा गया है। उन्हें “फेम प्रीमियम राइजिंग अवॉर्ड” के अंतर्गत भारत की 51 प्रेरणादायक महिलाओं में शामिल कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह में देशभर से कई प्रतिष्ठित और प्रेरणादायक महिलाएँ शामिल थीं, जिनमें प्रसिद्ध मुक्केबाज़ Mary Kom (मैरी कॉम), फ़िल्म निर्माता Aarushi Nishank (आरुषि निशंक) और लेंसकार्ट की स्वामिनी Nidhi Mittal (निधि मित्तल) जैसी प्रमुख हस्तियाँ भी मौजूद थीं। यह सम्मान नूपुर पंत के कला, नेतृत्व और उद्यमिता के योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता को दर्शाता है।
नूपुर पंत की कहानी केवल एक सफल गायिका की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस नई पीढ़ी की कहानी है जो अपनी जड़ों को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। हिमालय की धरती से मिली संवेदनशीलता और विश्व मंचों का अनुभव — इन दोनों का सुंदर संगम उनकी कला में दिखाई देता है। आज जब उत्तराखंड की प्रतिभाओं की चर्चा होती है तो नूपुर पंत का नाम गर्व के साथ लिया जाता है। उनकी आवाज़ न केवल संगीत प्रेमियों को आनंदित करती है बल्कि यह संदेश भी देती है कि पहाड़ों की वादियों से उठी प्रतिभा भी दुनिया के बड़े मंचों तक पहुँच सकती है।
