देहरादून, 06,01,2025
विकासनगर/ढकरानी। पछवादून क्षेत्र के ढकरानी क्रेशर उद्योगों पर कथित फर्जी पत्रकारों व यूट्यूब-फेसबुक पोर्टल संचालकों द्वारा की जा रही अवैध वसूली, धमकियों और ब्लैकमेलिंग को लेकर हमारे हमारी चौपाल में प्रकाशित खबर का असर सामने आया है। खबर के प्रकाशन के अगले ही दिन क्षेत्र में पहुंचे पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल के सामने ग्रामीणों ने खुलकर अपना दर्द साझा किया और स्वीकार किया कि कुछ स्वयंभू सोशल मीडिया आईडी वाले तथाकथित पत्रकार लगातार खनन व क्रेशर कारोबारियों को बदनाम करने और व्यापार बंद कराने की धमकियां देकर धन की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि इन लोगों की हरकतों से केवल उद्योग ही नहीं, बल्कि सैकड़ों स्थानीय परिवारों की रोजी-रोटी पर भी संकट मंडरा रहा है। यदि क्रेशर और खनन उद्योग बंद होते हैं तो क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैलने की आशंका है, साथ ही सरकार को मिलने वाला भारी राजस्व भी प्रभावित होगा।
बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए कि ढकरानी क्षेत्र के ठीक सामने हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब क्षेत्र में यमुना नदी में मशीनों से दिन-रात खनन हो रहा है, लेकिन वहां की गतिविधियों पर ये कथित पत्रकार कोई खबर नहीं चलाते। ग्रामीणों का कहना है कि संभवतः वहां से इन्हें धन व अन्य सुविधाएं मिलती होंगी, इसीलिए केवल उत्तराखंड के ढकरानी क्षेत्र को ही बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सरकार की छवि खराब हो और यहां के उद्योगों को नुकसान पहुंचे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे फर्जी पोर्टल संचालकों के पोर्टल तत्काल बंद किए जाने चाहिए और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही गांवों में इनके प्रवेश पर भी रोक लगाने की संस्तुति प्रशासन से की गई।
इस दौरान ग्रामीणों की ओर से वार्ड सदस्य अमित चौधरी, बिलाल शाह, रोहित चौधरी, कासिम, अंकित, इरशाद और मोनू सहित कई लोग सामने आए और उन्होंने अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया।
गौरतलब है कि ढकरानी क्रेशर एसोसिएशन द्वारा 29 दिसंबर को उपजिलाधिकारी विकासनगर को दिए गए शिकायती पत्र में पहले ही अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग और धमकियों के आरोप लगाए जा चुके हैं, जिसकी प्रतिलिपि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, अपर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, महानिदेशक सूचना तथा थाना प्रभारी विकासनगर को भी भेजी गई थी।
अब ग्रामीणों के खुलकर सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। क्षेत्र में उम्मीद जगी है कि प्रशासन जल्द ही इन फर्जी पत्रकारों व पोर्टलों पर शिकंजा कसते हुए कड़ी कार्रवाई करेगा, ताकि उद्योगों का संचालन भयमुक्त वातावरण में हो सके और स्थानीय लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
