Hamarichoupal,15,01,2026
देहरादून | राजधानी के पछुवादून इलाके में हरे भरे बगीचों काटने का काम लगातार जारी है । ताजा मामला चकराता रोड भाऊवाला क्षेत्र की गढ़वाली बस्ती का है। जहां पर्यावरण संरक्षण के तमाम दावों को धता बताते हुए दिनदहाड़े हरे-भरे पेड़ों पर आरी चला दी गई। बस्ती के भीतर करीब 12 बड़े पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में रोष और चिंता का माहौल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का नतीजा है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में चार पेड़ों का अवैध कटान किया गया था। उस समय hookup विभाग (उद्यान/वन विभाग) द्वारा न तो सख्त निगरानी की गई और न ही दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। केवल औपचारिक कार्रवाई करते हुए जुर्माना वसूला गया, जो अपराधियों के लिए कोई deterrent साबित नहीं हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पेड़ काटने की यह पूरी कार्रवाई दिन के उजाले में की गई। भारी मशीनों और आरी का उपयोग किया गया, इसके बावजूद न तो पुलिस मौके पर पहुंची और न ही विभागीय अधिकारी। इससे साफ है कि अवैध कटान करने वालों को किसी प्रकार का भय नहीं था।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यदि पहले हुए चार पेड़ों के कटान पर सख्त कानूनी कार्रवाई, एफआईआर और मुकदमा दर्ज किया गया होता, तो आज 12 और पेड़ों की बलि नहीं चढ़ती। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई न होना सीधे तौर पर पर्यावरण अपराध को बढ़ावा देने जैसा है।
पेड़ों के कटने से न केवल हरियाली नष्ट हुई है, बल्कि स्थानीय तापमान में वृद्धि, पक्षियों के आश्रय खत्म होने और भू-क्षरण जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है। गढ़वाली बस्ती के बुजुर्गों ने इसे “प्रकृति के साथ खुला अपराध” करार दिया है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, वन विभाग और उद्यान विभाग से मांग की है कि
इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
दोषियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए
काटे गए पेड़ों के बदले वृहद पौधारोपण कराया जाए
और क्षेत्र में भविष्य के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए
फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार दोषियों पर सिर्फ जुर्माना लगेगा या वास्तव में कानून का डंडा चलेगा।
