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चमोली (आरएनएस) । उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के गैरसैंण को लेकर दिए गए बयान ने राज्य की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है। उनके बयान के बाद पहाड़ के विभिन्न सामाजिक संगठनों, राज्य आंदोलनकारियों और क्षेत्रीय दलों में तीखी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई संगठनों ने इसे गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा है कि इस तरह के बयान राज्य आंदोलन की मूल भावना को आहत करते हैं।
चमोली,11,03,2026
चमोली (आरएनएस) । उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के गैरसैंण को लेकर दिए गए बयान ने राज्य की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है। उनके बयान के बाद पहाड़ के विभिन्न सामाजिक संगठनों, राज्य आंदोलनकारियों और क्षेत्रीय दलों में तीखी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई संगठनों ने इसे गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा है कि इस तरह के बयान राज्य आंदोलन की मूल भावना को आहत करते हैं।
दरअसल, बीते रोज सतपाल महाराज ने भराड़ीसैंण विधानसभा भवन को पर्यटन विभाग को सौंपने और वहां कॉरपोरेट कंपनियों की मीटिंग, सेमिनार तथा अन्य कार्यक्रम आयोजित कराने का सुझाव दिया। मंत्री के इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने के लिए वर्षों तक संघर्ष हुआ और हजारों लोगों ने आंदोलन किया, उसी गैरसैंण को इस तरह पर्यटन गतिविधियों के केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना आंदोलन की भावना का अपमान है। उनका आरोप है कि इससे यह संदेश जाता है कि सरकार गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के सवाल पर गंभीर नहीं है। स्थानीय संगठनों और क्षेत्रीय दलों ने भी मंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि गैरसैंण केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन की पहचान और संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में विधानसभा भवन को कॉरपोरेट बैठकों और आयोजनों के लिए उपयोग करने की बात करना उस ऐतिहासिक संघर्ष की गरिमा को कम करने जैसा है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि गैरसैंण का मुद्दा उत्तराखंड में बेहद संवेदनशील रहा है। राज्य गठन के बाद से ही इसे स्थायी राजधानी बनाने की मांग लगातार उठती रही है। यही कारण है कि समय-समय पर यहां विधानसभा सत्र आयोजित कर सरकारें इस मांग को संतुलित करने का प्रयास करती रही हैं। गौरतलब है कि गैरसैंण को भौगोलिक रूप से पहाड़ और मैदान के बीच संतुलित स्थान माना जाता है और राज्य आंदोलन के दौरान इसे स्थायी राजधानी के रूप में स्थापित करने की मांग प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। इसी उद्देश्य से यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस भराड़ीसैंण विधानसभा भवन का निर्माण किया गया, जहां समय-समय पर विधानसभा सत्र भी आयोजित होते हैं।
मंत्री के हालिया बयान के बाद अब पहाड़ के विभिन्न हिस्सों में एक बार फिर गैरसैंण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आंदोलनकारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस तरह के बयानों से पीछे नहीं हटती और गैरसैंण की राजधानी की संभावनाओं को कमजोर करने की कोशिश करती है तो राज्य में एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन खड़ा हो सकता है।
गैरसैंण का सियासी और आंदोलनकारी महत्व
* गैरसैंण को लंबे समय से उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठती रही है।
* राज्य आंदोलन के दौरान इसे पहाड़ और मैदान के बीच संतुलित राजधानी के रूप में देखा गया।
* यहां स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में समय-समय पर विधानसभा सत्र आयोजित होते हैं।
* गैरसैंण का मुद्दा आज भी राज्य की सियासत और जनभावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
