देहरादून,06,11,2025
झाझरा, देहरादून। उत्तराखंड राज्य के गठन की 25वीं वर्षगांठ, यानी रजत जयंती के पावन अवसर पर झाझरा वनक्षेत्र के अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक ‘खाराखेत’ स्थल पर एक अनूठा वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया। यह स्थल, जो महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है, आज फिर से इतिहास और पर्यावरण के संगम का साक्षी बना। वन विभाग की सक्रिय टीम के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘पहाड़ी पैडलर’ नामक युवा-प्रधान संस्था ने विशेष योगदान देकर न केवल पेड़ लगाए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी स्थापित किया।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खाराखेत का नाम नमक सत्याग्रह के कारण अमर हो चुका है। 1930 के दशक में यहां के साहसी ग्रामीणों ने ब्रिटिश राज के नमक पर लगे कर के विरुद्ध सत्याग्रह का नेतृत्व किया था। गांधीजी के आह्वान पर चले इस आंदोलन ने उत्तराखंड की पहाड़ी धरती को राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन का मजबूत स्तंभ बनाया। आज, ठीक इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर, राज्य सरकार के ‘वन महोत्सव’ और पर्यावरण संरक्षण अभियान के तहत 500 से अधिक पौधे रोपे गए। इनमें देवदार, बुरांश, काफल और अन्य स्थानीय प्रजातियां शामिल हैं, जो उत्तराखंड की जैव-विविधता को मजबूत करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायक सिद्ध होंगी।
इस कार्यक्रम में ‘पहाड़ी पैडलर’ संस्था का योगदान सराहनीय रहा। यह संस्था, जो साइकिलिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता फैलाती है, ने 50 से अधिक युवा स्वयंसेवकों के साथ भाग लिया। संस्था के संस्थापक राहुल नेगी ने बताया, “हमारी पहाड़ी धरती हमें साइकिल पर घुमाने का आनंद देती है, लेकिन अगर जंगल न रहे तो यह सब व्यर्थ हो जाएगा। खाराखेत जैसे स्थलों पर पेड़ लगाकर हम नमक सत्याग्रह के सिपाहियों को सलाम कर रहे हैं। हमारे सदस्यों ने न केवल पौधे लगाए, बल्कि स्थानीय बच्चों को साइकिलिंग के जरिए पर्यावरण संरक्षण का पाठ भी पढ़ाया।” संस्था ने विशेष रूप से साइकिलों पर लादकर पौधे लाए और रोपण के बाद एक छोटी साइकिल रैली भी निकाली, जिसमें ‘हरित उत्तराखंड, सशक्त उत्तराखंड’ का नारा गूंजा।
कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामवासी, स्कूली बच्चे और पर्यावरण प्रेमी भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। ग्राम प्रधान सरिता देवी ने कहा, “यह स्थल हमारी धरोहर है। आज के युवाओं का यह प्रयास देखकर लगता है कि हमारी आने वाली पीढ़ियां इतिहास को भूलेंगी नहीं।” वृक्षारोपण के बाद सभी ने सामूहिक रूप से एक शपथ ग्रहण की, जिसमें वादा किया गया कि रोपित पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी सामूहिक होगी।
यह अभियान उत्तराखंड सरकार के व्यापक पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें इस वर्ष पूरे राज्य में 10 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे स्थलों पर वृक्षारोपण से न केवल जैव-विविधता बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटक खाराखेत आकर नमक सत्याग्रह की कहानी सुनेंगे और हरे-भरे जंगलों के बीच इतिहास को जीवंत महसूस करेंगे।
रजत जयंती के इस अवसर पर खाराखेत का यह वृक्षारोपण न केवल पर्यावरण की पुकार है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की भावना को पुनर्जीवित करने का प्रतीक भी। यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे, तो उत्तराखंड निश्चित रूप से एक हरित राज्य के रूप में चमकेगा।
