चमोली,04,12,2025
देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग (UKSCPCR) की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने चमोली जनपद में एक शिक्षक द्वारा बालिका के साथ कथित अश्लील व्यवहार किए जाने की गंभीर घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाने की घोषणा की है। उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना बच्चों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है और ऐसी अमानवीय घटनाओं को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा।
आयोग ने बच्चों के लिए पूर्णतः सुरक्षित वातावरण स्थापित करने हेतु सभी स्कूलों, आश्रमों, छात्रावासों और बाल देखभाल संस्थानों (CCIs) के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने निर्देशित किया है कि इन सभी संस्थानों में कार्यरत समस्त कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराया जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वर्तमान तथा भविष्य में नियुक्त होने वाले सभी कर्मचारियों की नियुक्ति मनोवैज्ञानिक परीक्षण (Psychological Evaluation) के उपरांत ही सुनिश्चित हो। आयोग ने चमोली प्रकरण में पुलिस द्वारा की गई अब तक की समस्त कार्रवाई की विस्तृत आख्या (ATR) तत्काल आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है।

आयोग अध्यक्ष खन्ना ने घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और एसएसपी चमोली को विशेष निर्देश दिए हैं कि उक्त प्रकरण में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और घटना से संबंधित पूरी कार्यवाही की त्वरित आख्या आयोग को भेजी जाए। इसी बीच, आयोग अध्यक्ष गीता खन्ना द्वारा समर्पण खुला बाल आश्रय, चंद्रनगर में ओएनजीसी CSR के सहयोग से प्रदान की गई एक वाहन और स्मार्ट बोर्ड का उद्घाटन भी किया गया।
