HamariChoupal,09,09,2025
देहरादून: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने राज्य में आई आपदाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ₹20,000 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने यह मांग प्रधानमंत्री को लिखे 5 सितंबर के पत्र में भी दोहराई है। माहरा का कहना है कि राज्य को हुए भारी नुकसान को देखते हुए, पहले मांगी गई ₹10,000 करोड़ की राशि अब नाकाफी है। उन्होंने यह भी कहा कि धामी सरकार ने केंद्र से केवल ₹5,700 करोड़ की मांग की है, जबकि अकेले जोशीमठ के पुनर्निर्माण के लिए ही लगभग ₹6,000 करोड़ की आवश्यकता होगी।
अकेले जोशीमठ के लिए ₹6,000 करोड़ की जरूरत
माहरा ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुए नुकसान का हवाला देते हुए कहा कि कई प्रभावित क्षेत्रों में अब तक कोई भी आर्थिक मदद नहीं पहुंची है। उन्होंने कर्णप्रयाग के बहुगुणा ग्राम का जिक्र किया, जहां 35 मकान क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन परिवारों को कोई सहायता नहीं मिली। इसके अलावा, गोपेश्वर, नैनीताल (बलिया नाला), खटिया, खाती गांव, भराड़ी, सौंग और धारचूला जैसे इलाकों में भी भूस्खलन और आपदाओं के कारण भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गांवों के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम ₹20,000 करोड़ की आर्थिक सहायता बहुत ज़रूरी है।
वैज्ञानिकों की टीम भेजने की मांग
आकलन के लिए सरकारी टीम भेजने के बजाय, माहरा ने वैज्ञानिकों, भूवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीमों को भेजने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि ये टीमें भविष्य में होने वाली संभावित आपदाओं का सही आकलन कर सकती हैं और राज्य को ऐसी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने की रूपरेखा तैयार कर सकती हैं।
प्रमुख मांगें
करन माहरा ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:
- उत्तराखंड में आई मौजूदा आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।
- केंद्र सरकार तुरंत ₹20,000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज जारी करे।
- प्रत्येक आपदा पीड़ित परिवार को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से ₹10-10 लाख की तत्काल सहायता दी जाए।
- क्षतिग्रस्त मकानों और भवनों का उचित आकलन कर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाए।
- प्रभावित लोगों का विस्थापन टिहरी बांध विस्थापितों की तरह सुरक्षित स्थानों पर एकमुश्त किया जाए।
माहरा ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार का आपदा प्रबंधन तंत्र प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाया, और IIRS (Indian Institute of Remote Sensing) की चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया गया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इन मांगों को प्राथमिकता देने की अपील की, ताकि आपदा पीड़ितों को वास्तविक राहत मिल सके और उत्तराखंड भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सके।
