हल्द्वानी, 02 अप्रैल 2025(हमारी चौपाल ) उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की माननीय अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने आज हल्द्वानी स्थित विभिन्न विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्मला कॉन्वेंट स्कूल, राजकीय प्राथमिक विद्यालय कटघरिया, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कटघरिया, नेताजी सुभाष चंद्र बोस विद्यालय (हल्दीचौड़) एवं राजकीय इंटर कॉलेज का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान हल्दीचौड़ स्थित विद्यालयों की व्यवस्थाएँ संतोषजनक पाई गईं। विद्यालय में सुविधाएँ, बच्चों का अनुशासन एवं सफाई व्यवस्था सराहनीय रही। साथ ही, वार्डन और बच्चों के बीच सामंजस्य भी उत्कृष्ट देखा गया। इस अवसर पर मुख्य शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, कॉर्डिनेटर एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हालांकि, सरकारी विद्यालयों में कुछ खामियाँ भी देखी गईं। एक ही परिसर में जूनियर और प्राइमरी विद्यालय संचालित थे, जहाँ बच्चों के लिए पठन-पाठन की सामग्री तो उपलब्ध थी, परंतु सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं थी। आयोग द्वारा इस पर आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए।
निर्मला कॉन्वेंट स्कूल में गंभीर अनियमितताएँ
निरीक्षण के दौरान निर्मला कॉन्वेंट स्कूल में कई गंभीर अनियमितताएँ पाई गईं। विद्यालय की प्रधानाचार्य अवकाश पर थीं और उनकी अनुपस्थिति में किसी भी वरिष्ठ अध्यापिका द्वारा प्रशासनिक कार्यों का संचालन नहीं किया जा रहा था। इसके बजाय, लेखाकार को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिन्हें विद्यालय की कार्यप्रणाली एवं बाल अधिकारों की जानकारी नहीं थी।
विद्यालय में 1098 और बाल अधिकार संरक्षण आयोग की जानकारी का कोई प्रसार नहीं किया गया था। कक्षाओं में अनुमत संख्या से अधिक बच्चों का दाखिला किया गया था, जिसके कारण छोटे बच्चों को अत्यधिक भीड़भाड़ वाले वातावरण में बैठना पड़ रहा था। इसके अलावा, विद्यालय द्वारा छात्रों को दी जाने वाली डायरी में उत्तराखंड की संस्कृति व इतिहास से संबंधित कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि विद्यालय परिसर को विशेष धर्म के प्रतीकों से सजाया गया था, जबकि सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान किया जाना आवश्यक है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इसे अनुचित बताते हुए निर्देश दिया कि इस स्थिति को शीघ्र ठीक किया जाए।
स्वास्थ्य एवं परामर्श सेवाओं की कमी
विद्यालय में 3000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, किंतु प्राथमिक चिकित्सा सुविधा नगण्य पाई गई। प्रधानाचार्य कक्ष में मात्र एक छोटा-सा प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स रखा गया था, जबकि इतने बड़े विद्यालय के लिए उचित चिकित्सा सुविधा आवश्यक है। पूछने पर बताया गया कि आवश्यकता पड़ने पर एक नर्स को बुला लिया जाता है।
इसके अतिरिक्त, विद्यालय में कोई स्थायी काउंसलर नियुक्त नहीं किया गया था। निरीक्षण के दौरान काउंसलर के रूप में एक अध्यापिका को प्रस्तुत किया गया, जो कक्षा 11 और 12 के छात्रों को मनोविज्ञान पढ़ाती हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि एक योग्य एवं स्थायी काउंसलर की नियुक्ति आवश्यक है।
विद्यालय परिसर में पीटीए (अभिभावक-शिक्षक संघ), 1098 हेल्पलाइन, एवं उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग से संबंधित कोई भी जानकारी प्रदर्शित नहीं की गई थी, जिसे अनिवार्य रूप से लगाया जाना चाहिए।
आयोग ने दिए आवश्यक निर्देश
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने निर्देश दिया है कि विद्यालय प्रबंधन इन सभी कमियों को शीघ्र अति शीघ्र दूर करे और इस संबंध में आयोग को अवगत कराए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के अधिकारों एवं उनकी सुरक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।