Hamarichoupal,08,01,2025
देहरादून|फिक्की फ्लो लेडीज़ ऑर्गनाइजेशन (एफआईसीसीआई फ्लो) उत्तराखंड चैप्टर द्वारा आयोजित दो दिवसीय फिक्की फ्लो सम्मेलन 2026 का द्वितीय दिवस 08 जनवरी 2026 को उत्साहपूर्ण वातावरण, सार्थक विचार-विमर्श एवं प्रेरणादायक सत्रों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
द्वितीय दिवस की शुरुआत द्वितीय उद्घाटन सत्र से हुई। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल की धर्मपत्नी एवं उत्तराखंड की प्रथम महिला द्वारा भेजे गए वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। अपने संदेश में उन्होंने महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व विकास एवं सतत विकास के क्षेत्र में एफआईसीसीआई फ्लो द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए सम्मेलन की सफलता हेतु शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि श्रीमती गीता धामी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि यदि महिलाएँ संकल्प, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के साथ आगे बढ़ें, तो वे न केवल स्वयं को बल्कि पूरे समाज को भी सशक्त बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएँ देशभर में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करें और इसी उद्देश्य के साथ कार्य करें।
इसके पश्चात “संकल्प से सिद्धि तक” विषय पर आयोजित सत्र में सुश्री नेहा जोशी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
तकनीकी सत्र-04 (जलवायु परिवर्तन) के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला “दैनिक निर्णयों से जलवायु-अनुकूल व्यवसाय तक” विषय पर केंद्रित रही। इसमें नीति एवं प्रशासन विद्यालय, बेंगलुरु द्वारा यह रेखांकित किया गया कि जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव तथा व्यवसाय में सतत उपाय अपनाकर जलवायु-अनुकूल भविष्य का निर्माण संभव है।
तकनीकी सत्र-05 (वित्तीय साक्षरता) के अंतर्गत “सुदृढ़ वित्तीय भविष्य की ओर कदम” विषय पर वूमनईस्टा, गुरुग्राम द्वारा महिलाओं को वित्तीय योजना, बचत, निवेश एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कोषाध्यक्ष श्री पुनीत मित्तल ने कहा कि सशक्त वित्तीय समझ और प्रभावी प्रबंधन किसी भी व्यवसाय की सफलता की आधारशिला होते हैं।
कार्यक्रम में प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट ने महिलाओं को निरंतर आगे बढ़ने, नेतृत्व संभालने एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। वहीं राज्य मंत्री, श्रम विभाग, श्रीमती गीता रावत ने श्रम क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका एवं उनके अधिकारों पर अपने विचार साझा किए।
इसके उपरांत आयोजित तकनीकी सत्र-06 (पैनल चर्चा) “व्यवसाय में महिलाएँ : स्थिरता को मूल आधार बनाना” विषय पर केंद्रित रहा। इस सत्र में श्रीमती श्रीलता कृष्णन, बेंगलुरु सहित अन्य विशेषज्ञों ने व्यापार में सतत विकास को केंद्रीय तत्व के रूप में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती लुबना ने एफआईसीसीआई से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एफआईसीसीआई फ्लो ने उन्हें आत्मविश्वास प्रदान किया और आगे बढ़ने की दिशा दिखाई। उन्होंने महिलाओं से निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहने का आह्वान किया।
सम्मेलन की सफलता में एफआईसीसीआई फ्लो की कार्यकारिणी सदस्याओं एवं सम्मेलन आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर कोमल बत्रा, नेहा शर्मा (राष्ट्रीय शासी निकाय सदस्य), त्रिप्ती बहल, मीनाक्षी सोती, स्मृति बट्टा एवं हरप्रीत कौर की सक्रिय सहभागिता एवं कुशल आयोजन क्षमता की विशेष रूप से सराहना की गई।
अंतिम सत्र में “महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों में सतत विकास” विषय पर विशेष चर्चा आयोजित की गई, जिसमें डॉ. सुरेखा डंगवाल ने महिलाओं के नेतृत्व में सतत विकास की भूमिका पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विशेष अतिथि श्री श्याम अग्रवाल एवं श्री कैलाश पंत ने भी महिला उद्यमिता में पर्यावरणीय एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को अपनाने पर बल दिया।
अंतिम सत्र की समन्वयक श्रीमती रूपा सोनी रहीं। इस सत्र में श्रीमती नीतिका शर्मा, श्री पी.के. जोशी (उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड), अमृत सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एकमत से कहा कि यदि महिलाएँ व्यवसाय के केंद्र में स्थिरता को रखें, तो समाज और पर्यावरण दोनों के लिए सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम का समापन समापन सत्र एवं प्रमाण-पत्र वितरण के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा सम्मेलन की समग्र उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।
