देहरादून, 20,11,2025
Anurag Gupta
देहरादून। राजधानी देहरादून में हरे-भरे पेड़ों का अवैध कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पछवादून क्षेत्र के भाऊवाला गढ़वाली बस्ती में पिछले दिनों बिना किसी सरकारी अनुमति के आम के कई पेड़ काटे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने जहाँ स्थानीय लोगों में नाराज़गी पैदा की है, वहीं वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ अज्ञात लोगों ने देर रात आम के पेड़ों का कटान किया और लकड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर मौके से फरार हो गए। पेड़ों की कटाई इतनी तेज़ी और योजनाबद्ध तरीके से की गई कि किसी को भनक तक नहीं लगी।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची, लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि टीम अभी तक बगीचे के वास्तविक मालिक की पहचान तक नहीं कर पाई है। टीम ने आसपास के लोगों से पूछताछ की लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।
उधर उद्यान विभाग की टीम भी मौके पर पहुँचकर निरीक्षण कर लौट गई, लेकिन दोनों विभागों के हाथ खाली ही रहे।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कटान की घटनाएँ बढ़ रही हैं, लेकिन विभाग इस बढ़ते माफिया तंत्र पर काबू पाने में असफल साबित हो रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायतें करने के बावजूद न तो निगरानी बढ़ाई गई और न ही दोषियों की पहचान हो पाई।
दून घाटी का नाम कभी अपने शानदार लीची बागों के लिए मशहूर था, लेकिन धीरे-धीरे वे इतिहास बनते जा रहे हैं।
स्थानीयों को डर है कि यदि आम के पेड़ों का कत्ल ऐसे ही चलता रहा, तो आने वाली नस्लें केवल किताबों में पढ़ेंगी कि देहरादून में कभी आम के बगीचे भी हुआ करते थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहा पेड़ों का अवैध कटान न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि भू-जल, तापमान और जैव विविधता पर भी इसका नकारात्मक असर हो रहा है।
जबकि सरकार और विभागों द्वारा हरियाली बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पेड़ों को रातों-रात काटा जाना चिंताजनक है।
भाऊवाला के लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि दोषियों की जल्द पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। साथ ही क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, निगरानी कैमरे लगाने और जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत बताई गई।
फिलहाल मामले की जांच जारी है, लेकिन विभाग की अनदेखी और पेड़ों के लगातार हो रहे अवैध कटान ने देहरादून की हरियाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
