Hamarichoupal,16,02,2026
देहरादून।
बैगइट कंसलटिंग ग्रुप तथा पेसिफिक मॉल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय “बेकर्स अफेयर विथ दून” कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस आयोजन का उद्देश्य बेकरी क्षेत्र में नवाचार, स्वाद एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करना रहा, जिसमें बड़ी संख्या में दूनवासियों ने सहभागिता कर विभिन्न उत्पादों का आनंद लिया।
कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों के लिए सैंडविच निर्माण, कपकेक सज्जा एवं विभिन्न मनोरंजक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। साथ ही घरेलू बेकर्स एवं घरेलू रसोइयों के लिए स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें समग्र स्वास्थ्य एवं मार्गदर्शन विशेषज्ञ कमल बत्रा, लाल कोठी आवास के संचालक समीर नाचीज, मालदेवता फार्म्स के संचालक अमित मनोचा, हिमाचल टाइम्स समूह की संचालक इन्द्राणी पांधी तथा नजर बट्टू की टीम ने अपने विचार व्यक्त किए।
आयोजन के दूसरे दिन आयोजित प्रतियोगिता में “केक रश बाय पूजा रावत” ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान “और होमली बेकर्स” को प्राप्त हुआ, जबकि तृतीय स्थान “द साइलेंट बकरी” ने हासिल किया। इसके अतिरिक्त “माया कैफे” को सर्वश्रेष्ठ सुसज्जित स्टॉल के लिए सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण देहरादून स्थित सुद्धोवाला कारागार द्वारा लगाया गया स्टॉल रहा, जहां बेकरी उत्पाद प्रदर्शित किए गए। उल्लेखनीय है कि ये उत्पाद कारागार में रह रहे बंदियों द्वारा तैयार किए गए थे। इस पहल ने आत्मनिर्भरता एवं पुनर्वास की दिशा में एक सकारात्मक संदेश दिया और उपस्थित लोगों ने इस प्रयास की सराहना की।
समापन अवसर पर राज्य मंत्री (उद्यमिता) विनोद उनियाल, राज्य मंत्री (संस्कृति विभाग, उत्तराखण्ड) मधु भट्ट, सोल फिट क्लाउड किचन की संचालक रूपा सोनी, चॉकलेट निर्माण विशेषज्ञ पारुल अग्रवाल एवं समाजसेवी ममता पांगती ने प्रतिभागियों को संबोधित कर घरेलू बेकर्स एवं रसोइयों का उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की आयोजक प्रिया गुलाटी ने कहा कि इस प्रकार के मंच घर से कार्य करने वाली महिलाओं एवं उभरते उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है तथा उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त होते हैं।
लेखिका दीपा चावला का भी कार्यक्रम में विशेष सहयोग रहा।
यह आयोजन स्वाद, सृजनात्मकता, सामाजिक सरोकार एवं महिला सशक्तिकरण का संगम साबित हुआ और देहरादून में आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश देने में सफल रहा।
