Hamarichoupal,11,02,2026
बलदेव भट्ट
देहरादून। परेड ग्राउंड में चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 की भव्य सफलता के बाद जिस प्रकार हजारों लोगों की भीड़, स्टॉलों, झूलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा मैदान गुलजार रहा, उसी के उपरांत फैली गंदगी को स्वयं आयोजक संस्था द्वारा साफ किया जाना एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।
सेवा संकल्प फाउंडेशन, जिसने 5 से 8 फरवरी तक उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का सफल आयोजन किया, ने मेले के समापन के तुरंत बाद परेड ग्राउंड में व्यापक सफाई अभियान चलाकर सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया। यह पहल इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि सामान्यतः बड़े आयोजनों के बाद सार्वजनिक स्थल अव्यवस्थित छोड़ दिए जाते हैं, किंतु यहां आयोजकों ने स्वयं मैदान की स्वच्छता का दायित्व उठाया।
ज्ञात हो कि महोत्सव के दौरान प्रदेश के 13 जनपदों से आए कारीगरों, किसानों, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और लोक कलाकारों ने लगभग 100 स्टॉलों के माध्यम से अपने उत्पादों और कला का प्रदर्शन किया। नंदा शिखर सम्मान से प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया तथा प्रदेश के सुप्रसिद्ध लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक वातावरण को जीवंत बनाए रखा। स्वाभाविक रूप से इतने बड़े आयोजन के बाद मैदान में प्लास्टिक, कागज, खाद्य सामग्री के अवशेष और अन्य कचरा इकट्ठा हो गया था।
महोत्सव के उपरांत आयोजित सफाई अभियान में संस्था से जुड़े अनेक गणमान्य जन और स्वयंसेवक सक्रिय रूप से शामिल हुए। इस अवसर पर राज्य मंत्री हेमराज बिष्ट, वरिष्ठ पत्रकार बलदेव चंद्र भट्ट के के मदान, ललित जोशी, देबू बिष्ट (ओएनजीसी), अनिल कटायट, सुश्री नेहा शर्मा,आनंद मोहन रतूड़ी, मधुसूदन जोशी, राजू बिष्ट, गीताराम गौड़, श्याम अग्रवाल, हरीश सामंत, शुभम क्षेत्री, पवन सिंह,भुवन तिवारी, श्रीमती गीता खन्ना, श्री मनमोहन बटकोरा, सुश्री ममता पांगती, श्रीमती लीला प्याल, श्रीमती हंसा धामी, श्रीमती बबीता शाह लोहानी, भूपेंद्र रायाल,पंकज बर्मन, श्रीमती वंदना बिष्ट, श्रीमती शर्मिष्ठा कफिलिया, गणेश कांडपाल, श्रीमती रमा चौपड़ा, राजीव सच्चर, बसंत जोशी, गंगा गिरी, गिरीश बर्गली, ललित शौर्य, आर.जे.ओ. काव्य, राजीव सोलंकी, आचार्य विमल पाण्डेय तथा श्रीमती अंजना कुनियाल सहित अन्य सहयोगियों ने श्रमदान किया।
सफाई अभियान के दौरान मैदान के विभिन्न हिस्सों से कचरा एकत्रित कर पृथक-पृथक किया गया तथा नगर निगम के सहयोग से उसके निस्तारण की व्यवस्था की गई। स्वयंसेवकों ने यह संदेश भी दिया कि सांस्कृतिक आयोजनों की सफलता तभी पूर्ण मानी जाएगी जब उसके बाद पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का भी समान ध्यान रखा जाए।
संस्था की ओर से कहा गया कि उत्तरायणी कौथिक केवल लोकसंस्कृति का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। लोक परंपराओं, आत्मनिर्भरता और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाएगा।
परेड ग्राउंड में आयोजित यह सफाई अभियान अपने आप में एक अनुकरणीय पहल माना जा रहा है। सामाजिक संगठनों और आयोजकों के लिए यह एक संदेश है कि बड़े आयोजनों के बाद सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है जितना आयोजन की भव्यता।
इस पूरे अभियान की पहल सेवा संकल्प फाउंडेशन की संस्थापक श्रीमती गीता धामी के निर्देशन में की गई। बताया जाता है कि पूर्व में परेड ग्राउंड में आयोजित बड़े कार्यक्रमों के बाद मैदान में फैली गंदगी को लंबे समय तक यूँ ही छोड़ दिया जाता था, जिसे लेकर उनके मन में चिंता बनी रहती थी।
इसी भावना को मूर्त रूप देते हुए उन्होंने इस बार उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन के तुरंत बाद स्वयं सफाई अभियान प्रारंभ कराने का निर्णय लिया। उनके स्पष्ट निर्देशन और प्रेरणा से पूरी टीम ने संगठित रूप से मैदान की साफ-सफाई का दायित्व संभाला।
श्रीमती धामी का मानना है कि किसी भी सांस्कृतिक आयोजन की सफलता केवल उसकी भव्यता से नहीं, बल्कि आयोजन स्थल को पूर्ववत स्वच्छ और व्यवस्थित छोड़ने से भी आंकी जानी चाहिए। उनके नेतृत्व में किया गया यह प्रयास सामाजिक उत्तरदायित्व का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है।
देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ स्वच्छता का यह संकल्प राजधानी में चर्चा का विषय बना हुआ है।
