देहरादून, 26 अक्टूबर। गंभीर अप्लास्टिक एनीमिया से जूझ रही 30 वर्षीय रफिया शेरिन को जीवन बचाने वाले ब्लड स्टेम सेल प्रत्यारोपण के लिए अब भी उपयुक्त डोनर की तलाश है। यूनाइटेड किंगडम के प्रेस्टन में रहने वाली रफिया की मदद के लिए केरल में बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया, जिसे लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला। उनके पूर्व कॉलेज सुल्लमुस्सलम कॉलेज में महज दो दिनों के भीतर 11 हजार से अधिक लोगों ने संभावित ब्लड स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराया। DKMS फाउंडेशन इंडिया के अनुसार, यह संगठन के इतिहास में व्यक्तिगत स्तर पर आयोजित सबसे बड़ा डोनर पंजीकरण अभियान है।
रफिया शेरिन गंभीर अप्लास्टिक एनीमिया नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में शरीर की अस्थि मज्जा पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं, सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स नहीं बना पाती। गंभीर स्थिति में मरीज को जानलेवा संक्रमण और अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा हो सकता है। ऐसे में समय पर उपचार और उपयुक्त डोनर मिलना बेहद महत्वपूर्ण है।
रफिया की अपील पर उमड़ा जनसमर्थन
अपने लिए सही डोनर की तलाश कर रहीं रफिया ने इस संघर्ष को जागरूकता अभियान का रूप दिया है। वह विशेष रूप से दक्षिण एशियाई मूल के लोगों से संभावित स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराने की अपील कर रही हैं, ताकि गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे अन्य मरीजों को भी उपयुक्त डोनर मिल सके।
रफिया के परिवार और दोस्तों ने DKMS फाउंडेशन इंडिया के साथ मिलकर केरल में कई पंजीकरण अभियान आयोजित किए। मंजेरी में 1,500 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया, जबकि तिरूर में एक दिन के भीतर 4,200 से अधिक लोग संभावित डोनर बने। इसके बाद अक्टूबर की शुरुआत में सुल्लमुस्सलम कॉलेज में अभियान चलाया गया। पहले ही दिन छह हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया। लोगों की भारी भागीदारी को देखते हुए अभियान दूसरे दिन भी जारी रखा गया और अंततः पंजीकरण का आंकड़ा 11 हजार के पार पहुंच गया।
इस अभियान में 200 से अधिक स्वयंसेवकों ने सहयोग किया। प्रतिभागियों की सुविधा के लिए निःशुल्क बस सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। रफिया के परिवार के सदस्य भी पूरे अभियान के दौरान मौजूद रहे और लोगों को इस पहल के महत्व के बारे में जानकारी देते रहे।
आनुवंशिक अनुकूलता के कारण डोनर मिलना चुनौतीपूर्ण
ब्लड स्टेम सेल प्रत्यारोपण के लिए मरीज और डोनर के बीच अनुकूलता होना आवश्यक है। यह अनुकूलता मुख्य रूप से मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) की विशेषताओं पर निर्भर करती है, जो आनुवंशिक रूप से निर्धारित होती हैं। इसी वजह से कई मरीजों के लिए उपयुक्त डोनर ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है। समान पूर्वज-वंश से संबंध रखने वाले लोगों में अनुकूलता मिलने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। इसलिए डोनर सूची में दक्षिण एशियाई समुदाय समेत विभिन्न समुदायों के लोगों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
रफिया ने कहा कि यदि उनकी बीमारी और डोनर की तलाश से लोगों को दक्षिण एशियाई मूल के मरीजों की मुश्किलों के बारे में जानकारी मिलती है, तो यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिक से अधिक लोग पंजीकरण कराकर दूसरे मरीजों के लिए जीवन बचाने की उम्मीद बनेंगे।
DKMS फाउंडेशन इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष पैट्रिक पॉल ने कहा कि संभावित स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराने वाला प्रत्येक व्यक्ति उपयुक्त डोनर की तलाश कर रहे मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। उन्होंने दो दिनों में 11 हजार से अधिक लोगों के पंजीकरण को सामूहिक प्रयासों की ताकत बताते हुए रफिया के परिवार, स्वयंसेवकों और अभियान में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि उपयुक्त डोनर की जरूरत केवल एक मरीज तक सीमित नहीं है। रक्त कैंसर, थैलेसीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया और अन्य गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए डोनर की उपलब्धता बढ़ाना आवश्यक है। अधिक लोगों के पंजीकरण से अनुकूल डोनर मिलने की संभावना बढ़ सकती है और जरूरतमंद मरीजों को जीवनरक्षक प्रत्यारोपण का अवसर मिल सकता है।
दो दिन में 11 हजार लोगों ने कराया स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण, गंभीर बीमारी से जूझ रही रफिया को अब भी सही डोनर की तलाश
केरल के कॉलेज में चला विशेष अभियान, दक्षिण एशियाई मूल के मरीजों के लिए उपयुक्त डोनर की कमी ने बढ़ाई चिंता
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