Bरेनु शर्मा
हरिद्वार ( हमारी चौपाल) निंरनजन मिश्रा के घर पर आदर्श नगर जगजीतपुर हरिद्वार में की गई और पूरे विधि विधान से पूजा पाठ किया गया।
बसंत पंचमी के आसपास का समय है, तो माता सरस्वती के बारे में जानना और भी सुखद है। हिंदू धर्म में माता सरस्वती को विद्या, वाणी, संगीत और कला की देवी माना जाता है।
यहाँ उनके बारे में कुछ विशेष बातें दी गई हैं:
स्वरूप और प्रतीक
श्वेत वस्त्र: माता सरस्वती श्वेत (सफेद) वस्त्र धारण करती हैं, जो पवित्रता, शांति और ज्ञान का प्रतीक है।
वीणा: उनके हाथों में वीणा इस बात का संकेत है कि ज्ञान और कला के बिना जीवन में कोई संगीत या लय नहीं है।
पुस्तक और माला: एक हाथ में पुस्तक (वेदों का प्रतीक) और दूसरे में माला (एकाग्रता और ध्यान का प्रतीक) होती है।
हंस: उनका वाहन ‘हंस’ है। हंस अपनी नीर-क्षीर विवेक बुद्धि (दूध और पानी को अलग करने की क्षमता) के लिए जाना जाता है, जो हमें सही और गलत के बीच भेद करना सिखाता है।
महत्व और पर्व
ज्ञान की अधिष्ठात्री: विद्यार्थियों, कलाकारों और संगीतकारों के लिए वे सबसे पूजनीय हैं। माना जाता है कि उनकी कृपा से ही बुद्धि का विकास होता है।
बसंत पंचमी: माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को माता सरस्वती का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना और माता की विशेष पूजा करना शुभ माना जाता है।
एक सुंदर श्लोक
उनकी वंदना के लिए यह श्लोक बहुत प्रसिद्ध है:
”या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।”
(अर्थ: जो कुंद के फूल, चंद्रमा और बर्फ के हार के समान श्वेत हैं और जो शुभ्र वस्त्र धारण करती हैं।)
क्या आप माता सरस्वती से जुड़ी कोई विशेष पौराणिक कथा सुनना समझना चाहिए।
जिसमे डां विशाल गर्ग समाज सेवी योगेश चौधरी सचिन चौधरी गोपाल क्षा सागर क्षा और धनंजय आदि ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम को शुरू किया।
आचार्य सागर झा। पंडित धनंजय झा। मिथिलेश झा।
सागर झा गोपाल झा कुंदन मिश्रा। राजकुमार ठाकुर। आदेश ठाकुर। सत्येंद्र शर्मा। कुल रतन पांडे। शिवेश झा गंगोत्री देवी। पूनम झा। रेनू शर्मा। उषा कोटवाल। दिलों देवी। माला देवी।
