देहरादून,उधमसिंहनगर,21,12,2025
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर डाम क्षेत्र में स्थित पांडवकालीन प्राचीन मंदिर के सौंदर्यीकरण को मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत स्वीकृति मिल गई है। इस घोषणा के साथ ही क्षेत्र में हर्ष और गर्व का माहौल है। यह निर्णय न केवल स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि धार्मिक पर्यटन को नई गति देने वाला भी साबित होगा।
इस संबंध में आपदा प्रबंधन मंत्री विनय रोहिल्ला द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मंदिर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पौराणिक महत्ता को रेखांकित करते हुए सौंदर्यीकरण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया था। पत्र में उल्लेख किया गया कि डाम क्षेत्र का यह मंदिर पांडवकालीन विरासत का प्रतीक है, जहां प्राचीन मंदिर, सरोवर और सभ्यता के अवशेष आज भी क्षेत्र की गौरवशाली परंपरा का साक्ष्य हैं। श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या के बावजूद बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत अब मंदिर तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क का निर्माण, शौचालयों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के ठहरने हेतु धर्मशाला, साधु-संतों के निवास की सुविधा तथा मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन सरोवर के संरक्षण और सुव्यवस्थित विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक गरिमा बनी रहे।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी मुख्यमंत्री धामी ने पार्टी और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के अनुरोध पर हिडिंबा देवी मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा की थी, जिसका कार्य आज सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। उसी क्रम में डाम क्षेत्र के पांडवकालीन मंदिर को मिली यह मंज़ूरी सरकार की निरंतरता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
क्षेत्र की सम्मानित जनता और भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा गया है कि आपदा मंत्री विनय रोहिल्ला के सतत प्रयासों और मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल से इस ऐतिहासिक मंदिर को नया जीवन मिलेगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और डाम क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।
देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और संवर्धित करने की दिशा में यह घोषणा एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसे क्षेत्रवासी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य सौगात के रूप में देख रहे हैं।
