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इसे सत्ता का नशा कहें या गैर जिम्मेदारी

शाह आलम/अनुराग गुप्ता
देहरादून । बढ़ती गर्मी में जहां जनता पानी के लिए हलकान है वहीं दूसरी तरफ नगर निगम असंवेदनशील बना हुआ है किसी भी चौक चौराहे पर नगर निगम की ओर से या किसी भी अन्य विभाग की ओर से किसी तरह भी प्याऊ की व्यवस्था नहीं कराई गई है जिससे राज्य की राजधानी की छवि धूमिल हो रही है वही पर्यटक भी नगर निगम के इस रवैए से खासे नाराज नजर आ रहे हैं।
उत्तराखंड में गर्मी अपनी  चरम पर है राजधानी देहरादून मैं भी गर्मी अपने पिछले 3 वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ चुकी है स्थानीय यात्रियों के साथ ही पर्यटक भी इस प्रचंड गर्मी से त्रस्त नजर आ रहे हैं और बड़ी किल्लत यात्रियों की सुविधा के लिए पानी की व्यवस्थाओं का नहीं होना बनी हुई है हालांकि कुछ संस्थाएं अपने स्तर से यात्रियों के हलक तर करने का प्रयास करते हुए जगह-जगह शरबत बांटकर लोगों के हलक तर कर रहे हैं लेकिन वही ऐसे मुद्दे पर नगर निगम असंवेदनशील बना हुआ है।
 नगर निगम द्वारा बड़े चौराहों रेलवे स्टेशन बस अड्डे आदि बड़ी जगहों पर गर्मी से त्रस्त यात्रियों को पानी जैसी जरूरी सुविधाएं तक भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं जिससे स्थानीय व्यक्तियों के अलावा पर्यटक भी पानी की बोतल खरीद कर अपनी प्यास बुझाते नजर आ रहे हैं एक स्थानीय यात्री का कहना है कि ऐसी भरी गर्मी में बाहर निकलना मुश्किल हो चला है लेकिन जरूरी कार्य हेतु निकलना मजबूरी है हम बाहर निकलते हुए घर से पानी की बोतल साथ लेकर तो चलते हैं लेकिन पानी खत्म होने पर किसी भी चौक चौराहे पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने से बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है ।
पेट्रोल पर भी पेट्रोल पंप पर भी कभी-कभी पानी उपलब्ध नहीं हो पाता अगर नगर निगम विभाग जिम्मेदारी निभाएं और पानी की व्यवस्था प्रत्येक चौक चौराहे पर आते तो जनता को आसानी होगी ।
वहीं गुजरात से आए एक पर्यटक ने कहा कि इस गर्मी के चलते वह देहरादून  घूम रहे हैं तब से सैकड़ों रुपयों का पानी खरीद कर पी चुके हैं राजधानी होने के बावजूद भी यहां चौक चौराहे पर कहीं भी साफ पेयजल की व्यवस्था सरकार की तरफ से नहीं कराए जाना बेहद गैर जिम्मेदाराना रवैया है।
अब इसे सत्ता का नशा कहें या गैर जिम्मेदारी जब नगर निगम मेयर  सुनील उनियाल गामा से नगर निगम द्वारा व्यवस्था करने से संबंधित सवाल पूछा गया तो मेयर साहब ने बड़ी गैर जिम्मेदारी से जवाब देते हुए कहा कि निगम के क्षेत्र में अगर अपना सफाई से संबंधित कार्य अधिकारी पूरा कर ले तो गनीमत है हम पर इतने काम हैं हम वही नहीं कर पा रहे हैं।
पानी की व्यवस्था क्या करेंगे यह काम जल विभाग का है नगर निगम की तरफ से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है मेयर साहब की इस बात को क्या समझा जाए क्या मेयर साहब अपनी जिम्मेदारियों से परेशान आ चुके हैं  क्या यह समझा जाए की मेयर साहब अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में सक्षम नहीं है अब यह बात तो मेयर साहब ही जाने लेकिन सच तो यह है कि गर्मी की प्रसन्नता के चलते स्थानीय और बाहरी यात्रियों को अब मात्र ऐसी संस्थाओं का ही सहारा है जो इस भीषण गर्मी में उनके हलक तर कर सके।

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